पाठ ९: ममता
अभ्यास, स्वाध्याय और पुनरावर्तन 2
कक्षा 8 हिंदी
■ अभ्यास (पृष्ठ 62)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) प्रसादजी ने ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति किसे कहा ?
उत्तर: प्रसादजी ने काशी के उत्तर में स्थित 'धर्मचक्र विहार' को, जो मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खंडहर था, ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति कहा है।
(2) शहंशाह हुमायूँ के आदेश का किस प्रकार पालन हुआ ? वह सही था या गलत ? अपने विचारों में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शहंशाह हुमायूँ ने अपनी जान बचाने वाली ममता की टूटी झोंपड़ी की जगह पक्का घर (महल) बनवाने का आदेश दिया था। इस आदेश का पालन सैंतालीस (47) वर्षों के बाद हुआ, जब उसके पुत्र अकबर ने उस स्थान पर एक विशाल गगनचुंबी अष्टकोण मंदिर बनवाया। मेरे विचार से हुमायूँ के आदेश का पालन तो हुआ, परंतु जिस तरह से हुआ वह पूरी तरह 'गलत' था। क्योंकि उस गगनचुंबी मंदिर के शिलालेख पर केवल हुमायूँ और उसके पुत्र अकबर का नाम लिखा गया, लेकिन उस उदार और आश्रय देने वाली ममता का कहीं कोई ज़िक्र तक नहीं था। यह ममता के त्याग और निःस्वार्थ सेवा के साथ घोर अन्याय था।
(3) कहानी के आधार पर मुख्य पात्र ममता के बारे में कहिए।
उत्तर: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र पुत्री थी। वह एक बाल-विधवा थी। उसके मन में धन का कोई लोभ नहीं था, इसलिए उसने पिता द्वारा लाए गए स्वर्ण-उपहारों को भी ठुकरा दिया था। वह एक निडर, धर्मपरायण और सच्ची भारतीय नारी थी। अपने पिता के हत्यारे मुगलों से घृणा होने के बावजूद, उसने अपना 'अतिथि-धर्म' निभाया और हुमायूँ को अपनी झोंपड़ी में आश्रय दिया। वह आजीवन गाँव के लोगों के सुख-दुख की सहभागिनी रही। वह एक आदर्श, त्यागी और परोपकारी स्त्री का सटीक उदाहरण है।
(4) कहानी के अंतिम वाक्य को हटाकर कहानी का अंत अपने अनुसार कहिए।
उत्तर: (कहानी का अंतिम वाक्य है: "पर उसमें ममता का कहीं नाम न था।") यदि इस वाक्य को हटाकर मुझे कहानी का अंत करना हो, तो मैं इस प्रकार करूँगा: "उस अष्टकोण मंदिर के शिलालेख पर बड़े अक्षरों में लिखा गया - 'महान आश्रयदात्री ममता की पावन स्मृति में, जहाँ सातों देश के नरेश हुमायूँ ने विश्राम किया था।' इस प्रकार महान सम्राट् अकबर ने एक साधारण परंतु महान भारतीय नारी के त्याग को युगों-युगों के लिए अमर कर दिया।"
■ स्वाध्याय (पृष्ठ 62 - 66)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफरत क्यों थी ?
उत्तर: ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफरत इसलिए थी क्योंकि उसके पिता (रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि) का वध क्रूर और छली पठान सैनिकों ने ही किया था। उसी घटना के कारण उसे हर आततायी और क्रूर सैनिक से घृणा हो गई थी।
(2) ममता की झोंपड़ी में आश्रय माँगने कौन आया?
उत्तर: चौसा के भयानक युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर, अपनी जान बचाने के लिए थका हुआ मुगल बादशाह 'हुमायूँ' एक साधारण पथिक के रूप में ममता की झोंपड़ी में आश्रय माँगने आया था।
(3) अकबर ने अष्टकोण मंदिर कब और कहाँ बनवाया ?
उत्तर: अकबर ने अष्टकोण मंदिर सैंतालीस (47) वर्षों के बाद उस जगह पर बनवाया, जहाँ काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार के खंडहरों के पास ममता की झोंपड़ी स्थित थी, जिसमें उसके पिता हुमायूँ ने विपत्ति के समय एक रात विश्राम किया था।
(4) घोड़े पर सवार होते हुए पथिक ने मिरज़ा से क्या कहा?
उत्तर: घोड़े पर सवार होते हुए पथिक (हुमायूँ) ने अपने सैनिक मिरज़ा से कहा, "मिरज़ा, उस स्त्री को मैं कुछ दे न सका, उसका घर बनवा देना क्योंकि मैंने विपत्ति में यहाँ विश्राम पाया था। यह स्थान भूलना मत।"
(5) किस बात से पता चलता है कि ममता सबके सुख-दुःख की सहभागिनी थी ?
उत्तर: जब ममता सत्तर वर्ष की वृद्धा हो गई थी और शीतकाल में बीमार होकर अपनी झोंपड़ी में पड़ी थी (उसका कंकाल खाँसी से गूंज रहा था), तब उसकी सेवा के लिए गाँव की दो-तीन स्त्रियाँ उसे घेरकर बैठी थीं और उसे सीपी से जल पिला रही थीं। गाँव वालों के इस प्रेम और सेवाभाव से स्पष्ट पता चलता है कि ममता आजीवन सबके सुख-दुःख की सहभागिनी रही थी।
प्र. 2. नीचे दिए गए वाक्यों को निर्देश के अनुसार भिन्न-भिन्न कालों में परिवर्तन कीजिए:
उत्तर:
- (1) तेनालीरामन के बारे में अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं। (भूतकाल)
उत्तर: तेनालीरामन के बारे में अनेक कहानियाँ प्रचलित थीं। - (2) सुबह होने पर हिना अपने बेटे को साथ लेकर उद्यान में गई। (भविष्यकाल)
उत्तर: सुबह होने पर हिना अपने बेटे को साथ लेकर उद्यान में जाएगी। - (3) प्रिया का गृहकार्य जल्दी समाप्त हो गया। (भविष्यकाल)
उत्तर: प्रिया का गृहकार्य जल्दी समाप्त हो जाएगा। - (4) हर्ष आज उपवास करेगा। (भूतकाल)
उत्तर: हर्ष ने कल उपवास किया था। (अथवा: हर्ष आज उपवास कर रहा था।) - (5) मनोज अक्सर जागता रहता था। (वर्तमानकाल)
उत्तर: मनोज अक्सर जागता रहता है।
प्र. 3. शब्दों के अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
उत्तर:
- (1) दुहिता = पुत्री / बेटी
वाक्य: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र दुहिता थी। - (2) वेदना = पीड़ा / दुःख
वाक्य: चोट लगने के कारण बीमार बच्चे के पैर में बहुत वेदना हो रही थी। - (3) उत्कोच = घूस / रिश्वत
वाक्य: एक सच्चा और ईमानदार अधिकारी कभी उत्कोच स्वीकार नहीं करता। - (4) जीर्ण = वृद्ध / जर्जर / बहुत पुराना
वाक्य: सत्तर वर्ष की उम्र में ममता का जीर्ण शरीर खाँसी से काँप रहा था। - (5) आततायी = अन्यायी / दूसरों को त्रास देने वाला
वाक्य: इतिहास गवाह है कि किसी भी आततायी को उसके पापों की सज़ा अवश्य मिलती है।
प्र. 4. नीचे लिखी कहानी एकवचन में है। इसे बहुवचन में लिखकर उच्च स्वर में पढ़िए :
(અહીં આખી વાર્તાને બહુવચનમાં ફેરવવાની છે)
उत्तर: अनेक चिड़ियाँ पेड़ों पर रहती थीं। उनके घोंसले जंगलों के पास थे। घोंसलों में उनके कई बच्चे थे। वे अपने बच्चों के साथ रहती थीं। एक दिन कई शिकारी वहाँ आए। वे चिड़ियों को मारना चाहते थे। चिड़ियों ने बच्चों को घोंसलों में सिर नीचे कर बैठने को कहा। वे खुद वहाँ से उड़ गईं और पत्तों में छिपकर बैठ गईं, शिकारी चिड़ियों को न देखकर वहाँ से चले गए।
प्र. 5. नीचे शरीर के कुछ अंगों के चित्र दिए गए हैं। प्रत्येक अंग से संबंधित तीन-तीन मुहावरे अर्थ सहित लिखकर वाक्य में प्रयोग करें :
(चूँकि चित्र में 'मुँह' की जगह 'माथा/सिर' है, इसलिए यहाँ आँख, सिर/माथा, और अन्य सामान्य अंगों के तीन-तीन मुहावरे दिए गए हैं:)
उत्तर:
- आँख:
- आँखों का तारा होना: (अर्थ - बहुत प्यारा होना) वाक्य: मेरा बेटा मेरी आँखों का तारा है।
- आँखें खुलना: (अर्थ - सच्चाई का पता चलना या होश आना) वाक्य: परीक्षा में फेल होने के बाद ही रमेश की आँखें खुलीं।
- आँख चुराना: (अर्थ - सामना न करना या छिपना) वाक्य: उधार के पैसे न चुका पाने के कारण वह मुझसे आँखें चुराता है।
- माथा / सिर:
- माथा ठनकना: (अर्थ - संदेह होना या किसी अनिष्ट की आशंका होना) वाक्य: उस अजनबी की मीठी-मीठी बातें सुनकर मेरा माथा ठनका।
- सिर आँखों पर बैठाना: (अर्थ - बहुत अधिक आदर-सम्मान करना) वाक्य: अच्छे काम करने वालों को समाज सिर आँखों पर बैठाता है।
- सिर मुंडाते ही ओले पड़ना: (अर्थ - काम शुरू करते ही बाधा आना) वाक्य: अभी तो व्यापार शुरू ही किया था कि अचानक हड़ताल हो गई, इसे कहते हैं सिर मुंडाते ही ओले पड़ना।
- हाथ:
- हाथ बँटाना: (अर्थ - मदद करना) वाक्य: छुट्टी के दिन मैं घर के कामों में अपनी माँ का हाथ बँटाता हूँ।
- हाथ मलना: (अर्थ - पछताना) वाक्य: समय पर पढ़ाई न करने वाले छात्र परीक्षा के बाद हाथ मलते रह जाते हैं।
- हाथ पीले करना: (अर्थ - विवाह करना) वाक्य: एक गरीब पिता ने बड़ी मुश्किल से अपनी बेटी के हाथ पीले किए।
- कान:
- कान भरना: (अर्थ - चुगली करना या भड़काना) वाक्य: मंथरा ने रानी कैकेयी के कान भरे।
- कान पर जूँ न रेंगना: (अर्थ - किसी बात का कोई असर न होना) वाक्य: मैंने उसे बहुत समझाया पर उसके कान पर जूँ तक नहीं रेंगी।
- कान का कच्चा होना: (अर्थ - बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों पर विश्वास कर लेना) वाक्य: वह कान का कच्चा है, इसलिए सब पर शक करता है।
प्र. 6. रूपरेखा के आधार पर कहानी लिखिए :
(मुद्दे: एक निर्दयी राजा - गुलाम को दंड...)
कहानी का शीर्षक : सिंह और गुलाम (या परोपकार का फल)
प्राचीन काल में एक अत्यंत निर्दयी राजा था। वह अपने सेवकों पर बहुत जुल्म करता था। एक दिन उसने अपने एक गुलाम (दास) को किसी छोटी सी गलती के लिए कठोर दंड दिया। राजा के अत्याचारों से तंग आकर वह गुलाम एक दिन मौका पाकर जंगल में भाग गया。
जंगल में भटकते हुए अचानक उसकी भेंट एक भयंकर सिंह (शेर) से हुई। गुलाम डर गया, परंतु उसने देखा कि सिंह लंगड़ाकर चल रहा है और दर्द से कराह रहा है। सिंह ने अपना एक पैर गुलाम के सामने कर दिया। गुलाम ने साहस करके देखा तो सिंह के पैर में एक बड़ा सा काँटा चुभा हुआ था। गुलाम ने दयालु होकर धीरे से वह काँटा निकाल दिया। सिंह को बहुत आराम मिला। दोनों में अच्छी मित्रता हो गई और वे जंगल में साथ-साथ रहने लगे。
कुछ दिनों बाद, राजा के सैनिकों ने जंगल में उस गुलाम को ढूँढ लिया और उसे गिरफ्तार करके वापस ले गए। राजा ने उसे मौत की सज़ा सुनाई। राजा ने तय किया कि उसे एक भूखे सिंह के सामने पिंजरे में छोड़ दिया जाए ताकि सिंह उसे खा जाए。
तय दिन पर, बड़े से मैदान में गुलाम को छोड़ दिया गया और पिंजरे से एक खूँखार भूखे सिंह को निकाला गया। सिंह दहाड़ता हुआ गुलाम की ओर झपटा, परंतु पास आते ही वह गुलाम को पहचान गया। यह वही सिंह था जिसके पैर से गुलाम ने काँटा निकाला था। सिंह उसे खाने के बजाय उसके पैरों में लोटने लगा और उसका हाथ चाटने लगा। सिंह का यह स्नेहपूर्ण व्यवहार देखकर राजा और सभी दरबारी हैरान रह गए。
जब राजा ने गुलाम से इसका कारण पूछा, तो उसने जंगल की पूरी घटना बता दी। एक खूँखार जानवर के ऐसे कृतज्ञतापूर्ण व्यवहार को देखकर राजा का मन भी पिघल गया। उसने गुलाम और सिंह दोनों को रिहा कर दिया (आज़ाद कर दिया)।
सीख: कर भला, तो हो भला। (परोपकार का फल हमेशा अच्छा मिलता है और जानवर भी प्रेम को समझते हैं।)
प्र. 7. चित्र के आधार पर कहानी लिखिए :
कहानी का शीर्षक - "इंसानियत" या "सच्ची सेवा"
एक दिन बहुत भयंकर गर्मी पड़ रही थी। तेज चिलचिलाती धूप में एक लाचार और प्यासी वृद्ध स्त्री (बूढ़ी औरत) रास्ते के किनारे बैठी थी। प्यास के कारण उसका बुरा हाल था। वह इतनी कमजोर थी कि उससे चला भी नहीं जा रहा था। वह रास्ते से गुजरने वाले लोगों से अपने लिए पानी माँग रही थी。
उસી रास्ते से कुछ लड़के हँसते-खेलते हुए निकले। उस वृद्ध स्त्री ने उनसे भी पानी माँगा, लेकिन वे लड़के बहुत लापरवाह थे। उन्होंने उस गरीब और प्यासी बुढ़िया की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और उसे बिना पानी पिलाए ही वहाँ से आगे चले गए。
थोड़ी देर बाद, उसी रास्ते से एक बहुत ही समझदार और दयालु लड़का गुजरा। उसने देखा कि एक बूढ़ी औरत जमीन पर बैठी है और प्यास से तड़प रही है। उस लड़के को उस वृद्ध स्त्री की ऐसी दयनीय हालत देखकर बहुत दया आई。
वह लड़का तुरंत गया और कहीं से एक बर्तन में पानी ले आया। उसने बहुत ही आदर और प्रेम के साथ उस प्यासी वृद्ध स्त्री को अपने हाथों से पानी पिलाया। ठंडा पानी पीकर उस स्त्री की प्यास बुझी और उसे बहुत राहत मिली。
पानी पीने के बाद, उस वृद्ध स्त्री ने खुश होकर उस दयालु लड़के को आशीर्वाद देते हुए कहा, "तुम बहुत अच्छे बच्चे हो।" उस छोटे से बालक ने अपनी सच्ची और निस्वार्थ सेवा से एक प्यासी वृद्ध स्त्री की मदद की。
सीख: हमें हमेशा लाचार, प्यासे, जरूरतमंद और बुजुर्ग लोगों (वृद्धों) की मदद करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही सच्चा मानव धर्म है।
प्र. 8. नीचे दिए गए शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण पहचान कर वर्गीकृत कीजिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(शब्द: हिमालय, मुझे, खट्टा, तुम्हें, बड़ौदा, सपना, साबरमती, सुंदर, छोटा, होशियार, हमारा, गुजरात)
उत्तर: वर्गीकरण और वाक्य प्रयोग
- संज्ञा (संज्ञा शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम होते हैं):
- हिमालय: (वाक्य) हिमालय भारत के उत्तर में स्थित सबसे ऊँचा पर्वत है।
- बड़ौदा: (वाक्य) बड़ौदा गुजरात राज्य का एक बहुत ही सुंदर और ऐतिहासिक शहर है।
- सपना: (वाक्य) कल रात सोते समय मैंने एक बहुत ही डरावना सपना देखा। (या, सपना मेरी बहुत अच्छी सहेली है।)
- साबरमती: (वाक्य) अहमदाबाद शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।
- गुजरात: (वाक्य) गुजरात भारत का एक बहुत ही समृद्ध और विकासशील राज्य है।
- सर्वनाम (जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं):
- मुझे: (वाक्य) मुझे किताबें पढ़ना बहुत पसंद है।
- तुम्हें: (वाक्य) तुम्हें रोज़ सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना चाहिए।
- हमारा: (वाक्य) हमारा देश भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
- विशेषण (जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं):
- खट्टा: (वाक्य) यह नींबू बहुत खट्टा है।
- सुंदर: (वाक्य) बगीचे में एक बहुत सुंदर मोर नाच रहा है।
- छोटा: (वाक्य) मेरे पास एक छोटा और प्यारा सा पिल्ला है।
- होशियार: (वाक्य) रोहन अपनी कक्षा का सबसे होशियार विद्यार्थी है।
■ पुनरावर्तन 2 (पृष्ठ 67 - 68)
प्र. 1. निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और इस विषय पर अपने साथियों से पूछने के लिए तीन प्रश्न बनाइए :
(परिच्छेद: समय बहुत कीमती है। गया हुआ धन वापस मिल सकता है, पर बीता हुआ समय कभी वापस नहीं लौट सकता...)
उत्तर: परिच्छेद के आधार पर तीन प्रश्न इस प्रकार हैं:
- संसार में धन से भी अधिक मूल्यवान क्या है?
- हम जीवन में आगे किस प्रकार बढ़ सकते हैं?
- समय का सबसे अच्छा उपयोग क्या है?
प्र. 2. नीचे दिए गए शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण पहचान कर वर्गीकृत कीजिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(शब्द: पर्वत, उसको, मीठा, नदी, तुम्हें, सूरत, बाल, नर्मदा, सुंदर, बड़ा, मेहनती, हम, भारत)
उत्तर:
- संज्ञा (Noun): पर्वत, नदी, सूरत, बाल, नर्मदा, भारत
- पर्वत: (वाक्य) हिमालय भारत का सबसे ऊँचा पर्वत है।
- नदी: (वाक्य) गंगा भारत की एक पवित्र नदी है।
- सूरत: (वाक्य) सूरत कपड़ों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध शहर है।
- बाल: (वाक्य) उस छोटी बच्ची के बाल बहुत लंबे हैं।
- नर्मदा: (वाक्य) नर्मदा गुजरात की सबसे बड़ी नदी है।
- भारत: (वाक्य) मेरा देश भारत बहुत महान है।
- सर्वनाम (Pronoun): उसको, तुम्हें, हम
- उसको: (वाक्य) मैंने उसको पढ़ने के लिए एक अच्छी किताब दी।
- तुम्हें: (वाक्य) तुम्हें हमेशा बड़ों का आदर करना चाहिए।
- हम: (वाक्य) हम सब कल घूमने के लिए चिड़ियाघर जाएँगे।
- विशेषण (Adjective): मीठा, सुंदर, बड़ा, मेहनती
- मीठा: (वाक्य) यह आम बहुत मीठा है।
- सुंदर: (वाक्य) बगीचे में एक सुंदर मोर नाच रहा है।
- बड़ा: (वाक्य) मेरे चाचा जी का मकान बहुत बड़ा है।
- मेहनती: (वाक्य) रमेश एक बहुत ही मेहनती किसान है।
प्र. 3. दिए गए शब्दों को सही स्थान पर रखिए :
(कोष्ठक के शब्द: ऊपर, अभी, यहाँ-वहाँ, अधिक, ओर, धीरे-धीरे)
उत्तर:
- (1) मोनिका अभी खाना बना रही थी।
- (2) हवाई जहाज ऊपर उड़ रहा है।
- (3) दिनभर यहाँ-वहाँ देखा।
- (4) शिक्षक ने विद्यार्थी की ओर देखकर कहा।
- (5) काम अधिक करो, बातें कम।
- (6) बिल्ली धीरे-धीरे बाहर निकल गई।
प्र. 4. मौखिक उत्तर दीजिए :
(भले ही ये मौखिक प्रश्न हैं, पर आपके नियमानुसार मैंने इनके भी संपूर्ण और विस्तृत लिखित उत्तर दिए हैं)
(1) आपके परिवार में से आपको कौन सबसे ज्यादा पसंद है ? क्यों ?
उत्तर: मुझे मेरे परिवार में सबसे ज्यादा मेरी 'माँ' पसंद है। क्योंकि वे मेरा बहुत अच्छी तरह से खयाल रखती हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक वे मेरी हर जरूरत पूरी करती हैं। वे मुझे अच्छी-अच्छी बातें सिखाती हैं, मेरी पढ़ाई में मदद करती हैं और मेरे हर सुख-दुख में मेरी सच्ची मित्र की तरह साथ देती हैं।
(2) आपके गाँव/शहर के बारे में दस-बारह वाक्य बोलिए।
उत्तर:
- मेरे शहर का नाम अहमदाबाद है।
- यह गुजरात राज्य का सबसे बड़ा और प्रमुख शहर है।
- अहमदाबाद शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।
- मेरे शहर में कई ऐतिहासिक इमारतें और सुंदर मंदिर हैं।
- यहाँ का 'कांकरिया तालाब' और 'साबरमती आश्रम' (गाँधी आश्रम) पूरे देश में बहुत प्रसिद्ध हैं।
- अहमदाबाद अपने सूती कपड़ों के व्यापार और कारखानों के लिए भी जाना जाता है।
- यहाँ के लोग बहुत मिलनसार, शांतिप्रिय और व्यापारी स्वभाव के हैं।
- मेरे शहर में यातायात की बहुत अच्छी सुविधाएँ हैं, जैसे बी.आर.टी.एस. (BRTS) और मेट्रो ट्रेन।
- यहाँ उत्तरायण (पतंग का त्योहार) और नवरात्रि का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।
- मुझे मेरा अहमदाबाद शहर बहुत पसंद है और मुझे यहाँ रहने पर गर्व है।
(3) आपको पसंद हो ऐसी फिल्म का नाम बताकर संक्षेप में कहानी बताइए।
उत्तर: मुझे 'तारे ज़मीन पर' फिल्म बहुत पसंद है। इस फिल्म की कहानी एक छोटे बच्चे 'ईशान अवस्थी' के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे 'डिस्लेक्सिया' (पढ़ने-लिखने में तकलीफ की बीमारी) होती है। उसके माता-पिता उसकी इस परेशानी को नहीं समझ पाते और उसे एक सख्त बोर्डिंग स्कूल (हॉस्टल) में भेज देते हैं। वहाँ वह बहुत उदास रहने लगता है। फिर वहाँ एक नए कला शिक्षक (राम शंकर निकुंभ) आते हैं, जो ईशान की परेशानी को तुरंत पहचान लेते हैं। वे उसे प्यार और सही तरीके से पढ़ाते हैं, जिससे ईशान की पेंटिंग (चित्रकला) की अद्भुत प्रतिभा सबके सामने आती है और वह स्कूल का सबसे होनहार बच्चा बन जाता है। यह फिल्म हमें यह सीख देती है कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष गुण अवश्य होता है।
(4) यदि सूरज न निकले तो क्या होगा ?
उत्तर: यदि सूरज न निकले तो पृथ्वी पर चारों ओर भयंकर अँधेरा छा जाएगा। सूर्य की गर्मी न मिलने से पृथ्वी पर बहुत अधिक ठंड बढ़ जाएगी। सूरज की रोशनी (प्रकाश-संश्लेषण) के बिना पेड़-पौधे अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और सूख जाएँगे। पेड़-पौधे न होने से इंसानों और जानवरों को भोजन नहीं मिलेगा। अंततः, सूर्य के प्रकाश और ऊष्मा के बिना पृथ्वी पर जीवन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा।
(5) यदि आप गाँव के सरपंच होते तो......
उत्तर: यदि मैं गाँव का सरपंच होता, तो मैं अपने गाँव के संपूर्ण विकास के लिए पूरी ईमानदारी से काम करता। मैं गाँव में पक्की सड़कें बनवाता और हर घर में बिजली तथा पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था करता। मैं गाँव के बच्चों के लिए एक अच्छा स्कूल और युवाओं के लिए एक पुस्तकालय (लाइब्रेरी) बनवाता। बीमार लोगों के इलाज के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) खुलवाता। इसके अलावा, मैं गाँव में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देता और पर्यावरण बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने का अभियान चलाता, ताकि मेरा गाँव एक स्वच्छ और आदर्श गाँव बन सके।