पाठ ४: उठो, धरा के अमर सपूतों
(उठो धरा के अमर सपूतों)
अभ्यास, स्वाध्याय, भाषा-सज्जता और योग्यता-विस्तार
कक्षा 8 हिंदी
■ अभ्यास (पृष्ठ 24)
प्र. 1. आशय स्पष्ट कीजिए :
"युग-युग के मुरझे सुमनों में नयी-नयी मुस्कान भरो।
उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो ॥"
उत्तर: इन पंक्तियों का आशय यह है कि सदियों से जो फूल (देशवासी) मुरझाए हुए हैं, अर्थात् जो लोग लंबे समय से गुलामी, दुख और निराशा में डूबे हुए हैं, उनके चेहरों पर नई आशा और खुशी की मुस्कान भरनी है। कवि देश के वीर सपूतों से कहते हैं कि वे अपने अच्छे कार्यों से देशवासियों के मन में नया उत्साह जगाएं और देश का नवनिर्माण करें।
प्र. 2. कवि ने देश के सपूतों को क्या संदेश दिया है ?
उत्तर: कवि ने देश के सपूतों को यह संदेश दिया है कि वे अज्ञान, आलस्य और निराशा को त्याग कर देश के नवनिर्माण में जुट जाएं। वे लोगों के जीवन में नया उत्साह, नई आशा और नया प्राण भरें तथा अपने ज्ञान और कर्म से देश का भविष्य उज्ज्वल बनाएं।
प्र. 3. हमारी राष्ट्रीय संपत्ति कौन-कौन सी है ? उसकी सुरक्षा के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं ?
उत्तर: रेल, तार, डाकघर, राष्ट्रीय राजमार्ग, नदियाँ, जंगल, ऐतिहासिक इमारतें और सार्वजनिक बगीचे आदि हमारी राष्ट्रीय संपत्ति हैं। इनकी सुरक्षा के लिए हम कभी किसी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाएंगे। हम इनका सही उपयोग करेंगे, स्वच्छता बनाए रखेंगे और यदि कोई इन्हें नुकसान पहुँचा रहा हो, तो उसे रोकेंगे या संबंधित अधिकारियों को सूचित करेंगे।
■ स्वाध्याय (पृष्ठ 24 - 26)
प्र. 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) कवि माहेश्वरीजी धरा के अमर सपूतों से क्या चाहते हैं ?
उत्तर: कवि माहेश्वरीजी धरा के अमर सपूतों से चाहते हैं कि वे अज्ञान और निराशा के अंधकार को दूर करके देश में नया ज्ञान, नया उत्साह और नया प्राण भरें। वे युग-युग के मुरझाए हुए लोगों के चेहरों पर नई मुस्कान लाएं और नवयुग की नूतन वीणा में नया राग और गान भरकर देश का नवनिर्माण करें।
(2) कवि नई मुस्कान कहाँ देखना चाहते हैं ?
उत्तर: कवि नई मुस्कान युग-युग के मुरझे हुए सुमनों में, अर्थात् उन देशवासियों के चेहरों पर देखना चाहते हैं जो लंबे समय से दुख और निराशा का जीवन जी रहे हैं।
(3) देश के नवनिर्माण के लिए आप क्या-क्या करना चाहेंगे?
उत्तर: देश के नवनिर्माण के लिए मैं खूब पढ़ाई करूँगा और एक आदर्श नागरिक बनूँगा। मैं अपने देश से प्रेम करूँगा और इसकी उन्नति के लिए हर संभव प्रयास करूँगा। मैं समाज से बुराइयों को दूर करने और लोगों में एकता तथा भाइचारा बढ़ाने का कार्य करूँगा।
(4) इस कविता में कौन-सी बातें हैं, जिन्हें तुम अपने जीवन में उतारना चाहोगे ?
उत्तर: इस कविता से मैं देशभक्ति, साहस, उत्साह, निरंतर परिश्रम और निस्वार्थ सेवा जैसी बातों को अपने जीवन में उतारना चाहूँगा। मैं चाहूँगा कि मैं भी अपनी धरती का एक अमर सपूत बनूँ और अपने कार्यों से समाज और देश का नाम रोशन करूँ。
प्र. 2. दिए गए काव्य को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(काव्य: खड़ा हिमालय बता रहा है...)
(1) हिमालय हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर: हिमालय हमें यह संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में आने वाली आंधी, पानी और तूफानों (कठिनाइयों) से डरे बिना अपने रास्ते (लक्ष्य) पर डटे रहना चाहिए।
(2) मुसीबत आने पर हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर: मुसीबत आने पर हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने मार्ग पर अटल रहकर मुसीबतों का डटकर सामना करना चाहिए।
(3) कवि ने हिमालय को सबसे बड़ा क्यों कहा है ?
उत्तर: कवि ने हिमालय को सबसे बड़ा इसलिए कहा है क्योंकि उसने अपने जीवन में आई हर बाधा और तूफान का डटकर सामना किया और वह कभी अपने पथ से नहीं हिला।
(4) इस काव्य का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: इस काव्य का भावार्थ यह है कि जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मुसीबतों से घबराए बिना अपने मार्ग पर अटल रहता है, उसे जीवन में निश्चित रूप से सफलता मिलती है। बाधाओं से लड़कर ही मनुष्य महान बन सकता है।
(5) इस काव्य को योग्य शीर्षक दीजिए।
उत्तर: इस काव्य का योग्य शीर्षक "अटल हिमालय" या "हिमालय का संदेश" हो सकता है।
प्र. 3. चित्र के आधार पर कविता लिखिए, जिसमें निम्नलिखित शब्दों का उपयोग हुआ हो :
(शब्द: फूल, तितली, बादल, वृक्ष, बारिश)
उत्तर: (स्व-रचित कविता)
काले-काले बादल छाए,
रिमझिम-रिमझिम बारिश लाए।
हरे-भरे सब वृक्ष नहाए,
सुंदर-सुंदर फूल खिलाए।
रंग-बिरंगी तितली उड़ती,
खुशी से यह प्रकृति है झूमती।
प्र. 4. अपूर्ण काव्य को पूर्ण कीजिए :
माँ खादी की चद्दर दे दो, मैं गाँधी बन जाऊँगा.....
उत्तर:
घड़ी कमर में मैं लटकाऊँ,
आँखों पर चश्मा लगाऊँ।
हाथ में लाठी लेकर मैं,
सत्य-अहिंसा का पाठ पढ़ाऊँगा।
■ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 26 - 27)
• निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा ढूँढ़कर उसका भेद बताइए।
- (1) सोना कीमती धातु है।
उत्तर: सोना (द्रव्यवाचक संज्ञा), धातु (जातिवाचक संज्ञा) - (2) गंगा पवित्र नदी है।
उत्तर: गंगा (व्यक्तिवाचक संज्ञा), नदी (जातिवाचक संज्ञा) - (3) उमंग दौड़ रहा है।
उत्तर: उमंग (व्यक्तिवाचक संज्ञा) - (4) दल जा रहा है।
उत्तर: दल (समूहवाचक संज्ञा) - (5) राजेश भय के कारण जंगल में नहीं गया।
उत्तर: राजेश (व्यक्तिवाचक संज्ञा), भय (भाववाचक संज्ञा), जंगल (जातिवाचक संज्ञा)
• निम्नलिखित एकवचन वाक्य को बहुवचन में परिवर्तित कीजिए :
- (1) मुझे लुटेरे का डर था।
उत्तर: हमें लुटेरों का डर था। - (2) पक्षी ने उड़ान भरी।
उत्तर: पक्षियों ने उड़ानें भरीं। - (3) उसने मुझे मिठाई दी।
उत्तर: उन्होंने हमें मिठाइयाँ दीं।
• निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित भाववाचक संज्ञाओं को जातिवाचक संज्ञा में परिवर्तित करके वाक्य फिर से लिखिए :
- (1) विज्ञान ने दूरी को कम किया है। (यहाँ 'दूरी' भाववाचक है)
उत्तर: विज्ञान ने दूरियाँ कम की हैं। - (2) नदी की लम्बाई अधिक है। (यहाँ 'लम्बाई' भाववाचक है)
उत्तर: नदियों की लम्बाइयाँ अधिक हैं।
■ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 27)
• शिक्षक की मदद से प्रकृति के तत्त्वों पर आधारित काव्यों का संकलन कीजिए।
उत्तर: (यह छात्रों के लिए संकलन प्रवृत्ति है, उदाहरणस्वरूप एक काव्य नीचे दिया गया है:)
प्रकृति की सुंदरता निराली,
हर डाली पर छाई हरियाली।
नदियाँ कल-कल करती बहतीं,
पर्वत शिखरों से ये कहतीं।
सूरज, चाँद और ये तारे,
लगते हमको बहुत ही प्यारे।