पाठ २: ईदगाह
अभ्यास और स्वाध्याय
कक्षा 8 हिंदी
■ अभ्यास (पृष्ठ 13-14)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) हामिद ने चिमटा ही क्यों खरीदा ?
उत्तर: हामिद की दादी अमीना तवे से रोटियाँ उतारती थीं, तो उनके हाथ जल जाते थे। हामिद को अपनी बूढ़ी दादी का खयाल आया। उसने सोचा कि खिलौने तो मिट्टी के हैं और टूट जाएँगे, लेकिन अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे, तो वे बहुत प्रसन्न होंगी और उनकी उँगलियाँ कभी नहीं जलेंगी। चिमटा घर में हमेशा काम आने वाली चीज़ थी, इसीलिए हामिद ने चिमटा खरीदा।
(2) चिमटा खरीदने के लिए हामिद कौन से कारण बताता है?
उत्तर: चिमटा खरीदने के लिए हामिद अपने दोस्तों को कारण बताता है कि खिलौने मिट्टी के हैं, ज़रा-सा पानी पड़े या हाथ से छूट जाएँ तो वे चूर-चूर हो जाएँगे। लेकिन उसका चिमटा बहादुर शेर है, जो आग में, पानी में, आँधी में और तूफान में बराबर डटा रहेगा। वह यह भी बताता है कि चिमटे को कंधे पर रखने से वह बंदूक बन जाता है, हाथ में लेने से फकीरों का चिमटा बन जाता है, और चाहने पर मंजीरे का काम भी दे सकता है। उसका चिमटा सभी खिलौनों की जान निकाल सकता है।
(3) बूढ़ी अम्मा का क्रोध स्नेह में क्यों बदल गया ?
उत्तर: हामिद ने मेले से खाने-पीने की चीज़ें या खिलौने न लेकर दादी के लिए चिमटा खरीदा था। जब हामिद ने अपराधी भाव से कहा कि "तुम्हारी उँगलियाँ तवे से जल जाती थीं, इसलिए मैंने लिया", तो बूढ़ी अम्मा को यह एहसास हुआ कि बच्चे में कितना त्याग, सद्भाव और विवेक है। दूसरे बच्चों को खिलौने लेते और मिठाई खाते देखकर हामिद का मन ललचाया होगा, फिर भी उसने खुद पर काबू (जब्त) रखा और अपनी दादी के बारे में सोचा। इसी निस्वार्थ प्रेम को देखकर बूढ़ी अम्मा का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल गया।
(4) अब आप चिमटे के प्रयोग की तरह रुमाल के विविध प्रयोग बताइए।
उत्तर: (यह छात्र के विचारने योग्य प्रश्न है, इसका संभावित उत्तर इस प्रकार है:) चिमटे की तरह रुमाल के भी कई विविध प्रयोग हो सकते हैं। जैसे - पसीना पोंछने के लिए, हाथ-मुँह साफ करने के लिए, सर्दी-जुकाम होने पर नाक पोंछने के लिए, चोट लगने पर खून रोकने के लिए पट्टी के रूप में बाँधने के लिए, चिलचिलाती धूप में सिर ढंकने के लिए और कभी-कभी किसी गरम बर्तन को पकड़ने के लिए भी हम रुमाल का प्रयोग कर सकते हैं।
प्र. 2. इस कहानी का शीर्षक 'ईदगाह' ही क्यों रखा गया? इसके अलावा आप कौन-सा शीर्षक देना चाहेंगे? क्यों ?
उत्तर: कहानी का मुख्य प्रसंग ईद के दिन ईदगाह जाने, वहाँ नमाज़ पढ़ने और उसके बाहर लगे मेले में बच्चों द्वारा की गई खरीदारी से जुड़ा है। कहानी के सभी पात्र ईदगाह जाते हैं और हामिद का चिमटा खरीदने का सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय भी ईदगाह के मेले में ही घटित होता है। इसलिए इस कहानी का शीर्षक 'ईदगाह' बिल्कुल उचित है।
इसके अलावा मैं इस कहानी को "हामिद का चिमटा" या "दादी का सच्चा प्रेम" शीर्षक देना चाहूँगा। क्योंकि पूरी कहानी का मुख्य आकर्षण हामिद का त्याग और उसके द्वारा खरीदा गया चिमटा है, जो उसकी दादी के प्रति असीम प्रेम को दर्शाता है।
प्र. 3. निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(1) ऐतिहासिक ग्रंथों में परोपकार के कौन-कौन से उदाहरण मिलते हैं ?
उत्तर: ऐतिहासिक ग्रंथों में महर्षि दधीचि द्वारा मानव कल्याण के लिए अस्थि (शरीर) दान, राजा शिबि द्वारा पंडूक की रक्षा के लिए अंग दान, और महर्षि दयानंद द्वारा अपने प्राण लेने वाले रसोइए जगन्नाथ की प्राण रक्षा करने के परोपकार के उदाहरण मिलते हैं।
(2) ऋषि-मुनियों ने हमें क्या सीख दी है ?
उत्तर: ऋषि-मुनियों ने हमें सीख दी है कि निराश्रितों को आसरा दो, दीन-दुखियों और वृद्धों की शारीरिक और आर्थिक मदद करो, भूखों को भोजन करवाओ, और यदि विद्वान हो तो विद्या का प्रचार कर समाज का उद्धार करो।
(3) देश एवं समाज की उन्नति किस प्रकार होगी ?
उत्तर: यदि सभी लोग अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार परोपकार करते रहें, तो समाज एवं देश की निरंतर उन्नति होती रहेगी।
(4) विलोम शब्द लिखिएः आश्रित, अवनति
उत्तर:
- आश्रित का विलोम - निराश्रित
- अवनति का विलोम - उन्नति
(5) परिच्छेद के आधार पर अपने साथियों से पूछने के लिए तीन प्रश्न बनाइए।
उत्तर:
- १. दधीचि ने अपना शरीर क्यों त्याग दिया था?
- २. वर्तमान में सामाजिक संस्थाएँ देश के लिए क्या कर रही हैं?
- ३. मनुष्य जीवन को किस भावना के बिना निरर्थक माना गया है?
(6) इस परिच्छेद को उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर: इस परिच्छेद का उचित शीर्षक "परोपकार का महत्त्व" या "सच्चा परोपकार" हो सकता है।
प्र. 4. तुम भी हामिद की तरह किसी न किसी मेले में गए होगे, वहाँ तुमने क्या-क्या खरीदा और क्यों ?
उत्तर: (यह विद्यार्थी की स्व-प्रवृत्ति है, उत्तर का उदाहरण:) हाँ, मैं भी अपने शहर में लगने वाले नवरात्रि के मेले में गया था। वहाँ मैंने अपने लिए एक लकड़ी की बाँसुरी और अपनी छोटी बहन के लिए एक सुंदर गुड़िया खरीदी थी। मुझे संगीत का बहुत शौक है, इसलिए मैंने बाँसुरी ली और मेरी बहन को खिलौने बहुत पसंद हैं, इसलिए मैंने उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए गुड़िया खरीदी।
प्र. 5. यदि तुम्हें मेले से अपनी दादी के लिए कुछ खरीदना हो तो क्या खरीदोगे और क्यों ?
उत्तर: (यह विद्यार्थी की स्व-प्रवृत्ति है, उत्तर का उदाहरण:) यदि मुझे मेले से अपनी दादी के लिए कुछ खरीदना हो, तो मैं उनके लिए धार्मिक पुस्तकें (जैसे रामायण या भगवद्गीता) और एक अच्छी सी छतरी खरीदूँगा। धार्मिक पुस्तकों का पाठ करने से उन्हें आत्मिक शांति मिलेगी, और छतरी उन्हें धूप और बारिश में मंदिर आते-जाते समय बचाएगी।
■ स्वाध्याय (पृष्ठ 14-15)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) रोजे के दिन मुसलमान क्या करते हैं ?
उत्तर: रमजान के पवित्र महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं। वे पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करते हैं, उपवास करते हैं और खुदा (अल्लाह) की इबादत करते हैं।
(2) रमजान ईद के दिन मुसलमान लोग कहाँ जाते हैं ?
उत्तर: रमजान के पूरे तीस रोज़ों के बाद जब ईद आती है, तब मुसलमान लोग नमाज़ पढ़ने और एक-दूसरे के गले मिलने के लिए 'ईदगाह' जाते हैं।
(3) दुकानों में कौन-कौन से खिलौने मिल रहे थे?
उत्तर: मेले में दुकानों पर तरह-तरह के मिट्टी के खिलौने मिल रहे थे, जैसे - खाकी वर्दी और लाल पगड़ी वाला सिपाही, गुजरिया, राजा, काले चोगे वाला वकील, भिश्ती, और धोबिन।
प्र. 2. पेन्सिल में लिखित शब्दों के समानार्थी और विरोधी शब्द लिखिए :
उत्तर:
- शीतल: समानार्थी - ठंडा, ठंढा ; विरोधी - उष्ण, गर्म
- प्रसन्न: समानार्थी - खुश, आनंदित ; विरोधी - अप्रसन्न, उदास, खिन्न
- गरीब: समानार्थी - दरिद्र, निर्धन ; विरोधी - अमीर, धनवान
- अंधकार: समानार्थी - अँधेरा, तम ; विरोधी - प्रकाश, उजाला
- स्नेह: समानार्थी - प्रेम, प्यार ; विरोधी - नफरत, घृणा
- पुरानी: समानार्थी - प्राचीन, प्राक्तन ; विरोधी - नई, नवीन
प्र. 3. मुहावरों का अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
उत्तर:
- (1) बेड़ा पार लगाना: (अर्थ - किनारे ले जाना, संकट से बचाना)
वाक्य प्रयोग: भगवान ही गरीबों और बेसहारा लोगों का बेड़ा पार लगाते हैं। - (2) बाल बाँका न होना: (अर्थ - जरा भी नुकसान न होना)
वाक्य प्रयोग: मेरे बहादुर चिमटे का तुम्हारे खिलौने बाल भी बाँका नहीं कर सकते। - (3) छाती पीट लेना: (अर्थ - दुःख प्रकट करना)
वाक्य प्रयोग: मेले से भूखे-प्यासे हामिद को चिमटा लाते देखकर दादी अमीना ने अपनी छाती पीट ली। - (4) दिल चीरना: (अर्थ - बहुत दुःख पहुँचाना या मर्माहत करना) (पाठ में 'दिल कचोटना' का अर्थ कुछ न पाने पर दुःख होना है)
वाक्य प्रयोग: बेटे की बुरी बातों ने बूढ़े पिता का दिल चीर दिया।
प्र. 4. रूपरेखा के आधार पर कहानी पूर्ण कीजिए :
(एक नगर में दो स्त्रियाँ - एक ही बालक के लिए दावेदार - आपस में तकरार...)
कहानी का शीर्षक : असली माँ (सच्चा न्याय)
एक नगर में दो स्त्रियाँ रहती थीं। एक दिन उन दोनों के बीच एक छोटे से बालक को लेकर गहरा विवाद हो गया। दोनों ही स्त्रियाँ उस बच्चे पर अपना-अपना दावा कर रही थीं और कह रही थीं कि "यह बच्चा मेरा है।" जब आपस में उनकी तकरार बहुत बढ़ गई, तो मामले को सुलझाने के लिए वे दोनों न्यायाधीश के समक्ष पहुँचीं।
न्यायाधीश ने दोनों स्त्रियों की बातें बहुत ध्यान से सुनीं, लेकिन यह तय करना मुश्किल था कि असली माँ कौन है। अंत में न्यायाधीश ने न्याय करने के लिए एक तरकीब सोची। उन्होंने अपने सिपाही से कहा, "इस बालक के दो टुकड़े कर दो और दोनों स्त्रियों में आधा-आधा बाँट लो।"
यह कठोर बात सुनकर झूठा दावा करने वाली एक स्त्री मौन रही, उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। परंतु दूसरी स्त्री फूट-फूटकर रोने लगी और न्यायाधीश से हाथ जोड़कर कहने लगी, "महाराज! कृपया बच्चे को न काटें, उसे उसी स्त्री को दे दें। कम से कम मेरा बच्चा ज़िंदा तो रहेगा।"
न्यायाधीश को तुरंत पता चल गया कि असली माँ कौन है, क्योंकि एक सच्ची माँ अपने बच्चे की जान जाते नहीं देख सकती। न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया और रोती हुई स्त्री को उसका बालक सौंप दिया।
सीख: सत्य की हमेशा जीत होती है और माँ का प्रेम अतुलनीय होता है।
प्र. 5. निम्नलिखित अपूर्ण कहानी को अपने शब्दों में पूर्ण कीजिए :
(मौसम में ठंडक बढ़ने लगी थी। माँ सोचने लगी कि इस साल ढेर सारे स्वेटर बनाकर बेचने हैं जिससे अंकित की दसवीं कक्षा की फीस और पढ़ाई का खर्चा निकाला जा सके। अंकित के पापा नहीं थे। एक बड़ी बहन थी। अंकित अपने घर में समृद्धि लाने के लिए प्रतिदिन सोचता रहता है...)
उत्तर: ...कि वह अपनी माँ और बहन की मदद कैसे करे। एक दिन उसने निश्चय किया कि वह स्कूल के बाद अपने खाली समय का उपयोग करेगा। अगले ही दिन से उसने सुबह-सुबह अखबार बाँटने का काम शुरू कर दिया। वह सुबह जल्दी उठता और अपनी पुरानी साइकिल पर पूरे मोहल्ले में अखबार पहुँचाकर आता。
दूसरी तरफ, उसकी बड़ी बहन ने भी घर पर छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर माँ का हाथ बँटाना शुरू कर दिया। अंकित और उसकी बहन की यह मेहनत और लगन देखकर माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। परिवार के तीनों सदस्यों की मेहनत रंग लाई。
कुछ महीनों बाद जब अंकित की दसवीं कक्षा का परिणाम आया, तो उसने पूरे शहर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसकी इस सफलता पर सरकार की ओर से उसे आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिल गई। अब माँ को उसकी फीस की कोई चिंता नहीं थी। अपने अथक परिश्रम और सूझबूझ से अंकित ने घर में फिर से सुख और समृद्धि ला दी थी।