पाठ ४: गिनती ५१ से १००
स्वाध्याय और पुनरावर्तन 1
कक्षा 6 हिंदी
स्वाध्याय (पेज 26 से 29)
प्र. 1. उदाहरण के अनुसार जोड़े मिलाइए:
उत्तर:
- (क) तिहत्तर — ७३
- (ख) निन्यानबे — ९९
- (ग) छप्पन — ५६
- (घ) अठासी — ८८
- (च) छिहत्तर — ७६
- (छ) उनहत्तर — ६९
- (ज) पचासी — ८५
प्र. 2. गिनती को शब्दों में और शब्दों को अंकों में लिखिए :
उत्तर:
- (1) उन्नासी — ७९
- (2) चौहत्तर — ७४
- (3) उनसठ — ५९
- (4) तिरसठ — ६३
- (5) ७५ — पचहत्तर
- (6) ९० — नब्बे
- (7) ५४ — चौवन
- (8) ८९ — नवासी
प्र. 3. कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सर्वनाम चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए :
(कोष्ठक के शब्द: रमेश, वह, गीता, हम, उसे, मैं, हम, कौन - ध्यान दें: कोष्ठक में संज्ञा और सर्वनाम दोनों दिए गए हैं, हमें केवल सर्वनाम चुनकर रिक्त स्थान भरने हैं।)
उत्तर:
- (1) वह तीस वर्ष का है।
- (2) पता नहीं कौन दरवाजा खटखटा रहा है ?
- (3) वह पुस्तक रुचिकर है, उसे मैं भी पढूँगी।
- (4) हम सब मिलकर क्रिकेट खेलेंगे।
- (5) रविवार को मैं बाज़ार जाऊँगा।
प्र. 4. ५१ से ७३ तक के अंकों को क्रमशः जोड़कर चित्र बनाइए और रंग भरिए।
उत्तर: (यह विद्यार्थियों के लिए एक रचनात्मक प्रवृत्ति है। विद्यार्थियों को पेंसिल से ५१ से लेकर ७३ तक के अंकों को क्रमानुसार जोड़ना है, जिससे एक चित्र बनेगा। उसके बाद उसमें अपनी पसंद के सुंदर रंग भरने हैं।)
खेलें हम खेल (पेज 28-29):
उत्तर: (यह सांप-सीढ़ी जैसी एक खेल-प्रवृत्ति है। विद्यार्थियों को समूह में बैठकर पासा (Dice) फेंककर यह खेल खेलना है और गिनती का अभ्यास करना है।)
पुनरावर्तन 1 (पेज 30 और 31)
प्र. 1. निम्नलिखित रिक्त स्थानों को कोष्ठक में से सही शब्द चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए :
(शब्द: बाज़ार, वह, बिच्छू, अस्पताल, घर)
उत्तर:
- (1) सब लड़के अपने-अपने घर जा सकते हैं।
- (2) रमेश को बुखार था, इसलिए वह स्कूल नहीं गया।
- (3) मीना और जैमिनी बाज़ार जा रहे थे।
- (4) मैंने बिच्छू को दलदल से बाहर निकाला।
- (5) शिकारी हिरनी को अस्पताल ले गया।
प्र. 2. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) आपने किन-किन कहानियों का पठन किया है ?
उत्तर: मैंने 'दयालु शिकारी', 'प्यासा कौआ', 'बातूनी कछुआ', 'कौआ और लोमड़ी' तथा 'समझदार नन्ही' जैसी कई सुंदर कहानियों का पठन किया है।
(2) अपनी पढ़ी हुई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए?
उत्तर: मैंने 'समझदार नन्ही' कहानी पढ़ी है। इस कहानी में नन्ही नाम की एक बतख होती है। वह दलदल में फँसे एक बिच्छू की जान बचाती है, लेकिन बिच्छू अपने बुरे स्वभाव के कारण उसे डंक मार देता है। कुछ दिन बाद बिच्छू फिर से नदी में डूबने लगता है। नन्ही फिर से उसकी जान बचाती है। नन्ही की अच्छाई देखकर बिच्छू को बहुत शर्मिंदगी होती है और वह डंक मारने की अपनी बुरी आदत छोड़ देता है।
(3) शिकारी ने हिरनी को कैसे बचाया ?
उत्तर: शिकारी ने घायल हिरनी को तुरंत पशुओं के अस्पताल ले जाकर डॉक्टर से उसका इलाज करवाया और इस प्रकार उसने हिरनी और उसके छोटे बच्चे को बचाया。
(4) प्रगति, न्याय और मानव धर्म के लिए हमारा क्या कर्तव्य है ?
उत्तर: प्रगति, न्याय और मानव धर्म के लिए हमारा कर्तव्य है कि हम हमेशा विश्वबंधुत्व और समानता की भावना रखें। हम सभी के साथ प्रेम से रहें और विश्वशांति के लिए प्रयास करें।
(5) नन्ही बतख का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर: नन्ही बतख का स्वभाव बहुत दयालु और अच्छा था। किसी भी मुसीबत में पड़े जीव की मदद करना और भलाई करना वह अपना स्वभाव मानती थी।
प्र. 3. निम्नलिखित वर्णों से शुरू करके पाँच-पाँच शब्द बनाइए और वाक्य में प्रयोग कीजिए :
उत्तर:
- (1) च :
- चश्मा: दादाजी अखबार पढ़ने के लिए चश्मा पहनते हैं।
- चतुर: लोमड़ी एक चतुर और चालाक जानवर है।
- चाँद: रात के समय आसमान में चाँद चमकता है।
- चम्मच: छोटा बच्चा चम्मच से खाना खा रहा है।
- चरखा: गांधीजी नियमित रूप से सूत कातने के लिए चरखा चलाते थे।
- (2) क्ष :
- क्षमा: हमें दूसरों की गलतियों को क्षमा कर देना चाहिए।
- क्षत्रिय: क्षत्रिय युद्ध के मैदान में बहादुरी से लड़ते हैं।
- क्षण: हमारे जीवन का हर एक क्षण बहुत कीमती है।
- क्षेत्र: किसान अपने क्षेत्र (खेत) में काम कर रहा है।
- क्षय: क्षय (टीबी) एक बहुत ही गंभीर बीमारी है।
- (3) त :
- तरबूज: तरबूज बाहर से हरा और अंदर से लाल होता है।
- तालाब: हमारे गाँव के तालाब में सुंदर कमल खिले हैं।
- तलवार: पुराने समय में राजा युद्ध में तलवार का उपयोग करते थे।
- ताला: बाहर जाते समय मैंने घर के दरवाजे पर ताला लगा दिया।
- तोता: पेड़ पर बैठा तोता हरी मिर्च खा रहा है।
- (4) भ :
- भलाई: हमें निस्वार्थ भाव से हमेशा दूसरों की भलाई करनी चाहिए।
- भारत: भारत मेरा प्यारा देश है।
- भालू: मदारी ने बच्चों को भालू का नाच दिखाया।
- भोजन: मेरी माँ हमेशा बहुत स्वादिष्ट भोजन बनाती हैं।
- भाई: मेरा बड़ा भाई पढ़ाई में बहुत होशियार है।
प्र. 4. समान तुक (प्रास) वाले शब्द बनाकर लिखिए :
उत्तर:
- (1) सामाजिक: प्रामाणिक, धार्मिक, आर्थिक।
- (2) मानवता: दानवता, महानता, समानता।
- (3) भलाई: बुराई, सिलाई, कमाई।
- (4) घबराहट: मुस्कुराहट, कड़वाहट, आहट।
प्र. 5. गिनती को शब्दों में और शब्दों को अंकों में लिखिए :
उत्तर:
- (1) ९६ — छियानबे
- (2) ६७ — सड़सठ
- (3) ५१ — इक्यावन
- (4) ८८ — अट्ठासी
- (5) अठहत्तर — ७८
- (6) सत्तावन — ५७
- (7) उनहत्तर — ६९
- (8) सत्तानबे — ९७
प्र. 6. निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी (विलोम) शब्द लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
उत्तर:
- (1) स्वच्छ × अस्वच्छ (गंदा)
वाक्य: बीमारियों से बचने के लिए हमें कभी भी अस्वच्छ पानी नहीं पीना चाहिए। - (2) देश × विदेश
वाक्य: मेरे पिताजी काम के सिलसिले में एक साल के लिए विदेश गए हैं। - (3) प्रिय × अप्रिय
वाक्य: हमें कभी भी किसी व्यक्ति से अप्रिय और कड़वे शब्द नहीं बोलने चाहिए। - (4) अधिक × कम (थोड़ा)
वाक्य: आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए मुझे भूख बहुत कम लग रही है।
प्र. 7. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
उत्तर:
- (1) सूर्य = सूरज / रवि
वाक्य: सुबह सूरज निकलते ही चारों ओर प्रकाश फैल जाता है। - (2) भूमि = धरती / ज़मीन
वाक्य: बारिश होने के बाद पूरी धरती हरी-भरी हो गई है। - (3) प्राण = जान / जीव
वाक्य: डॉक्टर ने समय पर सही इलाज करके घायल मरीज के प्राण बचा लिए। - (4) सहसा = अचानक / एकाएक
वाक्य: जंगल में मैं पैदल जा रहा था कि सहसा मेरे सामने एक भालू आ गया।
प्र. 8. नीचे दिए गए चित्र का वर्णन करते हुए आठ-दस वाक्य लिखिए :
(ચિત્રના આધારે સામાન્ય પ્રકૃતિ કે ગામડાના દ્રશ્યનું વર્ણન)
उत्तर:
- (1) चित्र में एक सुंदर और शांत प्राकृतिक दृश्य दिखाई दे रहा है।
- (2) पीछे की तरफ ऊँचे-ऊँचे पहाड़ हैं।
- (3) पहाड़ों के पीछे से सूरज निकल रहा है और आसमान में पक्षी उड़ रहे हैं।
- (4) पहाड़ों के बीच से साफ पानी की एक नदी बहती हुई आ रही है।
- (5) नदी के किनारे हरे-भरे पेड़-पौधे और हरियाली छाई हुई है।
- (6) एक स्त्री (पनिहारिन) अपने सिर पर पानी का मटका (घड़ा) रखकर जा रही है।
- (7) किनारे पर कुछ छोटे-छोटे घर बने हुए हैं।
- (8) यह पूरा प्राकृतिक दृश्य बहुत ही सुंदर और मन को शांति देने वाला है।
प्र. 9. आप साइकिल लेकर स्कूल जाते हैं, और रास्ते में ट्यूब पंचर हो जाती है। इस घटना का वर्णन कीजिए।
उत्तर: एक दिन सुबह मैं अपनी साइकिल लेकर स्कूल जा रहा था। रास्ते में अचानक मेरी साइकिल के पहिए की ट्यूब पंचर हो गई। स्कूल पहुँचने में देरी हो रही थी, इसलिए मैं थोड़ा घबरा गया। फिर मैंने अपनी साइकिल को पैदल धकेलते हुए पास की एक साइकिल मरम्मत करने वाली दुकान तक पहुँचाया। मिस्त्री ने ट्यूब में हवा भरी और पंचर बनाया। इसमें काफी समय लग गया। अंततः जब मैं स्कूल पहुँचा, तो प्रार्थना सभा खत्म हो चुकी थी। मैंने अपनी कक्षा के शिक्षक को पूरी घटना सच-सच बताई। उन्होंने मेरी परेशानी को समझा और मुझे कक्षा में जाने की अनुमति दे दी।
प्र. 10. चित्र के आधार पर कहानी लिखिए।
कहानी का नाम : चतुर बंदर और मगरमच्छ
एक नदी थी। उस नदी के किनारे जामुन का एक बड़ा पेड़ था। उस पेड़ पर एक बंदर रहता था। वह रोज़ पेड़ से मीठे-मीठे जामुन तोड़कर खाता था। उसी नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था। धीरे-धीरे बंदर और मगरमच्छ में बहुत अच्छी मित्रता (दोस्ती) हो गई। बंदर रोज़ अपने मित्र मगरमच्छ को भी खाने के लिए मीठे जामुन देता था。
एक दिन मगरमच्छ ने उनमें से कुछ जामुन अपनी पत्नी को भी खिलाए। मीठे जामुन खाकर मगरमच्छ की पत्नी के मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि जो बंदर रोज़ ऐसे मीठे फल खाता है, उसका कलेजा (हृदय) कितना मीठा होगा! उसने मगरमच्छ से कहा कि मुझे उस बंदर का कलेजा खाना है, तुम उसे मेरे पास लेकर आओ। मगरमच्छ अपने मित्र को मारना नहीं चाहता था, लेकिन अपनी पत्नी की ज़िद के आगे वह मजबूर हो गया。
मगरमच्छ बंदर के पास गया और बोला, "मित्र, आज मेरी पत्नी ने तुम्हें हमारे घर दावत (भोजन) पर बुलाया है। तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें ले चलता हूँ।" बंदर खुशी-खुशी मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया। जब वे नदी के बीच गहरे पानी में पहुँचे, तब मगरमच्छ ने बंदर को सच बता दिया कि उसकी पत्नी उसका कलेजा खाना चाहती है。
यह सुनकर बंदर एक पल के लिए घबरा गया, लेकिन उसने समझदारी और चतुराई से काम लिया। बंदर ने मगरमच्छ से कहा, "अरे मित्र! तुमने यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई? मैं तो अपना कलेजा पेड़ की डाल पर ही सुरक्षित रख कर आया हूँ। चलो, जल्दी वापस किनारे पर लौट चलते हैं ताकि मैं अपना कलेजा लेकर आ सकूँ।"
मूर्ख मगरमच्छ बंदर की बातों में आ गया और उसे वापस नदी के किनारे पेड़ के पास ले गया। किनारे पर पहुँचते ही बंदर तुरंत छलाँग मारकर पेड़ पर ऊँचाई पर चढ़ गया। सुरक्षित होने के बाद बंदर ने हँसते हुए मगरमच्छ से कहा, "अरे मूर्ख! क्या किसी का कलेजा उसके शरीर से कभी अलग हो सकता है? तुमने मेरे साथ धोखा किया है, इसलिए आज से हमारी मित्रता समाप्त!" मगरमच्छ अपनी मूर्खता पर पछताता हुआ वापस लौट गया。
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मुसीबत के समय कभी घबराना नहीं चाहिए और अपनी बुद्धि तथा चतुराई से काम लेना चाहिए।